हिन्दी साहित्य को समर्पित
“हिंदी को एक दिन मत पहनना” हिंदी को एक दिन मत पहनना— जैसे पहने जाते हैं त्योहारों के नए कपड़े; मंच पर सजा लेना, फूल चढ़ा देना, दो शब्द कह…