हिन्दी साहित्य को समर्पित
मन के अंदर झाँक मन के अंदर झांक रे मनवा मन के अंदर झांक। बाहर का मत खोल रे दरबा मन के अंदर झांक रे मनवा मन के अंदर झांक।…
मन तू मेरे! मन की, मन में ही रखना हरगिज़ किसी से ना, मन की कहना जो भावों को समझें, समझो ठीक है जो अभावों को समझें, समझो नजदीक है…
देखो रे देखो जमाना बदल गया !! 2 !! देखो गौर से दूनियावालों , जमाना बदल गया ! हाय रे , जमाना बदल गया !! 2 !! देखो रे देखो…
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए। दुख भंजन सुख धाम कहिए।। खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए। दुख भंजन सुख धाम कहिए।। गीता का तू ने ज्ञान दिया…
हम सदा सबकी भाषा का आदर करें, पर हमें अपनी हिन्दी का अभिमान हो । अब हर इक दिन हमारा हो हिन्दी दिवस, हिन्द की अब तो हिन्दी ही पहचान…