हिन्दी साहित्य को समर्पित
आज इनकार के ख़ातिर ही सही, मुस्कुरा दीजिए, मेरी ख़ामोश मोहब्बत को ज़रा आज़मा लीजिए। आपकी आँखों में जो ठहर-सी गई है मेरी शाम, एक पल मेरी तरफ़ भी देखकर…
आपको बस एक झलक भर देखने से, दिल को सुकून मिलता है आपको देखने से। न जाने कौन-सा रिश्ता है आपसे मेरा, मुस्कुरा देता हूँ बस आपको देखने से। दूर…
प्रीत की खुशबू:— प्रीत की ख़ुशबू से हर इक मन महकता है यहाँ। दर्द हो कितना प्रणय फिर भी निखरता है यहाँ। सिया ने जीवन भर सम्मान मर्यादाओं का रखा,…
इश्क़ तौफीक है गुनाह नही आपने कुछ और ही समझ लिया, खाओगे तो जानोगे धोखे की बरकतें है क्या गुनहगार थे आप हमने जाहिद समझ लिया, नजरें थीं ही पाकदामन…