बिहिया (भोजपुर)। समाज सेवा किसी एक दिन या किसी खास अवसर तक सीमित रहने वाला कार्य नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद संवेदना और जिम्मेदारी की निरंतर अभिव्यक्ति है। बिहिया के युवा समाजसेवी अविनाश कुशवाहा लंबे समय से जरूरतमंद, बेसहारा और असहाय लोगों की मदद कर इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं।
अविनाश का सेवा भाव किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। सड़क किनारे कूड़ा और बोतलें चुनकर जीवनयापन करने वाले एक परिवार की मजबूरी जब उनके सामने आई, तो उन्होंने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। परिवार का छोटा बच्चा भी अपने माता-पिता के साथ काम करने के लिए निकलता है, जबकि उसकी मां पैरों से चलने में पूरी तरह असमर्थ हैं। परिवार की परिस्थिति को समझते हुए अविनाश ने उनके लिए सम्मानजनक भोजन की व्यवस्था की।
माँ का भी मिलता है पूरा साथ
इस सेवा कार्य में अविनाश अकेले नहीं हैं। उनकी मां भी इस नेक काम में उनका हाथ बंटाती हैं। जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था होने पर वह घर पर अपने हाथों से खाना तैयार करती हैं और उसे पैक करवाती हैं, ताकि अविनाश उसे जरूरतमंदों तक पहुंचा सकें। इस तरह सेवा की यह भावना केवल अविनाश तक सीमित नहीं, बल्कि उनके परिवार की संवेदना का भी हिस्सा बन चुकी है।
बिछड़ों को अपनों से मिलाया
अविनाश की सेवा भावना का एक बेहद भावुक पक्ष यह भी है कि उन्होंने वर्षों से अपने परिवार से बिछड़े एक व्यक्ति को उसके परिजनों से मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय से अपनों से दूर रहे उस व्यक्ति का अपने परिवार से दोबारा मिलना केवल उसके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक क्षण था। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद परिवार को अपना बिछड़ा सदस्य वापस मिला। यह प्रयास बताता है कि अविनाश की सेवा केवल भोजन या जरूरी सामान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे किसी इंसान को उसके अपनों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास करते हैं।
बच्चों के प्रति गहरी संवेदनशीलता
उनकी संवेदनशीलता बच्चों के प्रति भी दिखाई देती है। ‘प्रिंस’ एक ऐसा बच्चा है जिसके माता-पिता नहीं हैं और जिसका एक ही हाथ है। जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद वह अपने संघर्षों के साथ आगे बढ़ रहा है। बारिश के मौसम में उसकी परेशानी को देखते हुए अविनाश ने उसके लिए नया रेनकोट उपलब्ध कराया, ताकि वह बारिश से बच सके। किसी जरूरतमंद बच्चे की आवश्यकता को समझकर उसके लिए छोटी-सी सुविधा जुटाना भी उनके सेवा भाव का हिस्सा है।
इंसानियत के लिए इंसान के काम आना
अविनाश के ये प्रयास किसी प्रचार या दिखावे तक सीमित नहीं हैं। वे अपनी क्षमता के अनुसार लगातार जरूरतमंद लोगों की मदद करने का प्रयास करते हैं। किसी परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था हो, किसी जरूरतमंद बच्चे के लिए आवश्यक सामान उपलब्ध कराना हो या वर्षों से बिछड़े व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाने की कोशिश—उनके कार्यों में एक ही भावना दिखाई देती है, इंसानियत के लिए इंसान के काम आना।
इस सेवा भावना में उनकी मां का साथ इस प्रयास को और भी खास बना देता है। घर की रसोई से तैयार होकर जरूरतमंदों तक पहुंचने वाला भोजन केवल खाना नहीं, बल्कि एक मां के हाथों से निकली संवेदना और अपनापन भी है। बिना किसी दिखावे के घर से शुरू होकर जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली यह सेवा इंसानियत की उस परंपरा को जीवित रखती है, जिसमें किसी अनजान के लिए भी अपनेपन की जगह होती है।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब लोग अक्सर अपने आसपास मौजूद जरूरतमंदों की परेशानियों को भी नजरअंदाज कर देते हैं, ऐसे समय में किसी दूसरे के दर्द को महसूस करना और उसकी मदद के लिए आगे आना समाज के लिए सकारात्मक संदेश है। अविनाश कुशवाहा का यह लंबे समय से जारी सेवा-सफर बिहिया ही नहीं, बल्कि पूरे भोजपुर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है।
समाज सेवा के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। जरूरत होती है संवेदनशील नजर, मदद करने की इच्छा और किसी दूसरे के दर्द को अपना समझने वाले दिल की। अविनाश कुशवाहा और उनकी मां की यह सेवा-भावना इसी विश्वास को मजबूत करती है कि इंसानियत के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी किसी की जिंदगी में बड़ी उम्मीद बन सकता है।
