आज इनकार के ख़ातिर

आज इनकार के ख़ातिर ही सही, मुस्कुरा दीजिए,
मेरी ख़ामोश मोहब्बत को ज़रा आज़मा लीजिए।
आपकी आँखों में जो ठहर-सी गई है मेरी शाम,
एक पल मेरी तरफ़ भी देखकर दिल चुरा लीजिए।
आपके चेहरे की सादगी का क्या कहना हुज़ूर,
चाँद को भी आज ज़रा आईना दिखा दीजिए।
हमने माँगा भी तो आपसे कोई वादा नहीं,
बस कभी यादों में आकर हमें अपना कह दीजिए।
आपकी मुस्कान से रौशन है ये दिल आज भी,
आज इनकार ही सही… कल कभी इकरार कीजिए।
राहुल सोनी हसन बाजार भोजपुर बिहार

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