ज़रूरत से ज़्यादा

कभी-कभी सोचता हूँ, आखिर इंसान को चाहिए कितना? दो वक्त की रोटी, थोड़ा सुकून, और कोई अपना, जो पूछ ले— “सब ठीक है न?” लेकिन शायद हम इतने में कहाँ…

आज इनकार के ख़ातिर

आज इनकार के ख़ातिर ही सही, मुस्कुरा दीजिए, मेरी ख़ामोश मोहब्बत को ज़रा आज़मा लीजिए। आपकी आँखों में जो ठहर-सी गई है मेरी शाम, एक पल मेरी तरफ़ भी देखकर…

सालों से इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं बिहिया के अविनाश कुशवाहा, बेसहारा और जरूरतमंदों का बने हैं निस्वार्थ सहारा

बिहिया (भोजपुर)। समाज सेवा किसी एक दिन या किसी खास अवसर तक सीमित रहने वाला कार्य नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद संवेदना और जिम्मेदारी की निरंतर अभिव्यक्ति है। बिहिया…

“जो भीतर रह गया” — रिश्तों, प्रेम और वियोग के मुक्तक

“जो भीतर रह गया” — रिश्तों, प्रेम और वियोग के मुक्तक डूबती नाव को साहिल का किनारा मिला है, रेत को जैसे कोई चाँद सितारा मिला है। मैं चुकाऊँ भी…

सर, पहचान रहे हैं न?

आज का दिन मेरे लिए थोड़ा अलग था। अचानक मेरे पुराने बच्चों के दो ग्रुप मिल गए। कई साल बाद उनके चेहरे सामने थे और लगा जैसे समय ने एक…

मेरी कक्षा के दो सितारे

किसी शिक्षक के लिए इससे बड़ा सौभाग्य शायद ही कुछ हो कि उसकी कक्षा में प्रतिभा केवल दिखाई ही न दे, बल्कि रोज़ उसके सामने आकार लेती रहे। किताबों के…

अश्वनी शर्मा को ‘श्री सुमित्रानंदन पंत राष्ट्रीय सम्मान’ से किया गया सम्मानित

मुंबई। साहित्य के क्षेत्र में अपनी रचनात्मक प्रतिभा और प्रभावशाली लेखन के लिए साहित्यकार अश्वनी शर्मा को उनकी काव्य कृति ‘तकदीर का खेल’ (काव्य संग्रह) के लिए इंकलाब पब्लिकेशन, मुंबई…

एक झलक

आपको बस एक झलक भर देखने से, दिल को सुकून मिलता है आपको देखने से। न जाने कौन-सा रिश्ता है आपसे मेरा, मुस्कुरा देता हूँ बस आपको देखने से। दूर…

बेरोज़गार हूँ, बेकार नहीं

बेरोज़गार हूँ, बेकार नहीं कभी शब्दों से दुनिया सजाई थी, कभी सपनों की फसल उगाई थी, आज उन्हीं हाथों में खालीपन है, जिन हाथों ने कलम थामकर अपनी पहचान बनाई…

वोट का सौदागर

कहानी ”””””””” वोट का सौदागर ***********† ग्रामीण अंचल में अवस्थित रेलवे का गोविंदपुर हॉल्ट। संध्या के पाँच बज चुके थे। नई दिल्ली से आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस कुछ देर…