इश्क़ तौफीक है गुनाह नही

इश्क़ तौफीक है गुनाह नही
आपने कुछ और ही समझ लिया,

खाओगे तो जानोगे धोखे की बरकतें है क्या
गुनहगार थे आप हमने जाहिद समझ लिया,

नजरें थीं ही पाकदामन हमारी
जुबां ने इनको नापाक समझ लिया

दर्द की नुमाइश कर सके ना हम
कसक रह गई दिल मे आपने बेदर्द समझ लिया

शोर करके हासिल होना भी क्या
सादगी को मेरी कसूरवार समझ लिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *