प्रीत की खुशबू:—
प्रीत की ख़ुशबू से हर इक मन महकता है यहाँ।
दर्द हो कितना प्रणय फिर भी निखरता है यहाँ।
सिया ने जीवन भर सम्मान मर्यादाओं का रखा,
नारी का स्वाभिमान हर युग में सँवरता है यहाँ।
प्रीत की ख़ुशबू से इक हर मन महकता है यहाँ।
उर्मिला ने मौन रहकर जैसी तपस्या की कभी ,
उस समर्पण का देश में अभिमान होता है यहाँ।
प्रीत की ख़ुशबू से हर इक मन महकता चाहिए
राधा ने प्यार में अनुरागी से वियोग को जिया,
ऐसे पावन प्रेम पर हर दिल पिघलता है यहाँ।
प्रीत की ख़ुशबू से इक हर मन महकता है यहाँ।
मीरा ने सब अपमान सह प्रीति का साहस किया ,
विश्वास का चिराग स्नेह में चमकता है यहाँ।
प्रीत की ख़ुशबू से इक हर मन महकता है यहाँ।
दर्द हो कितना मगर फिर भी निखरता है यहाँ।
सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’
इन्दौर मध्यप्रदेश
