खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
गीता का तू ने ज्ञान दिया है,
कर्म का तू ने सार दिया है,
जीवन रण में लड़ना सिखाया,
हक के लिए तू ने अर्जुन लडाया।
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
मुरली बजा के तू ने राधा को मोहया,
सुदर्शन चला के तू ने गज को बचाया,
चीर बढ़ा के तू ने लाज को रखा है ,
नरसिंह भगत को भी तू ने सहारा दिया है।
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
अंधेरा धरा पर कितना घना है ?
आशा है टूटी, निराशा है छाई,
सुन ले रे छलिया ! हे कृष्ण कन्हैया !
इक बार आ के गले तू लगा ले!
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।
दुख भंजन सुख धाम कहिए।।
खाटू श्याम खाटू श्याम खाटू श्याम कहिए।……. गीतकार- प्रमोद कुमार
