हम सदा सबकी भाषा का आदर करें,
पर हमें अपनी हिन्दी का अभिमान हो ।
अब हर इक दिन हमारा हो हिन्दी दिवस,
हिन्द की अब तो हिन्दी ही पहचान हो।
खो गए पश्चिमी सभ्यता में यूँ हम,
हिन्दी भाषा का अपमान करते रहे।
अपनी माता का आदर न कर पाए हम,
और मौसी का सम्मान करते रहे।
सीखते हम रहें सबकी भाषा भले,
अपनी भाषा से लेकिन न अंजान हों।
हम सदा सबकी ….
एक धागे में सबको पिरोती है जो,
एकता की लड़ी है बनाती सदा।
दूरियाँ दो दिलों की घटाती है जो,
सबका संपर्क सबसे कराती सदा।
देशव्यापी से ये विश्वव्यापी बने,
सारी दुनिया में हिन्दी का गुणगान हो।
हम सदा सबकी ….
होने देंगे न हिन्दी का अपमान हम,
आज खुद को ही खुद ये वचन दीजिए।
हिन्दी भाषा का गौरव बढ़ाएँगे हम,
आज हिन्दी दिवस पर ये प्रण कीजिए।
हिन्दी भाषा सदा यूँ ही फूले – फले,
और सफल हम सभी का ये अभियान हो।
हम सदा सबकी ….
मुकेश पाण्डेय ‘जिगर’
अहमदाबाद, गुजरात
