मन के अंदर झांक

मन के अंदर झाँक

मन के अंदर झांक
रे मनवा
मन के अंदर झांक।

बाहर का मत खोल रे दरबा
मन के अंदर झांक
रे मनवा
मन के अंदर झांक।

कोई नहीं तेरा इस जग में
ना कर किसी की आश रे मनवा
मन के अंदर झांक
रे मनवा
मन के अंदर झांक।

जिसको तू ढूंढे बाहर की दुनिया में
है वो तेरे पास रे मनवा
मन के अंदर झांक
रे मनवा
मन के अंदर झांक।

– अमरीश पंडित ‘जानी’ (वैशाली, बिहार)

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