पथ की साथी बनती

जीवन के दुर्गम पथ पर
साथ तेरा मिल जाता
तारक नभ में
असीम दिव्य लहर सी
मधुर गीत बन
खुशबू सी कण-कण में बस जाती
चिरजीवन की प्यास बुझाकर
विश्व की पहली जागृति बन
तेरे पद के पदचिह्न नहीं
पथ की की साथी बनती
तेरी साँसों में बांध साँसें
जीवन की मधुर बेला सी
शरद चाँदनी में
बन स्वप्न की हकीकत
मधु मिलन कथा सी
खुशियों के दीप जलाती
तुझे बना लक्ष्य
विरह बेधते लोचन
मन-मंदिर में प्रेम ज्योति जला
पथ की साथी बनती

One thought on “पथ की साथी बनती”

  1. युगल किशोर पत्रिका में रचना भेजना मेरे लिए खुशी की बात है।
    धन्यवाद इंकलाब पब्लिकेशन 🙏

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