ज़माना बदल गया है
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ख़ुद पर करें ऐतवार,
खुद से करें प्यार ,
ज़माना बदल गया है।
सज्जन बन,
करें वक्त का इंतजार,
ज़माना बदल गया है।
दुष्टों का होगा वहिष्कार,
फिर होगा उसका संसार,
ज़माना बदल गया है।
क्यों न करें कोई तिरस्कार,
पर बदलना नहीं अपना संस्कार,
ज़माना बदल गया है।
एक दिन होगा अपनी जीत,
होगा दुराचारी संग दुष्टों की हार,
ज़माना बदल गया है।
खुद पर करें ऐतवार,
खुद से करें प्यार,
ज़माना बदल गया है।
ज़माना बदल गया है।।
—– स्वरचित व मौलिक
अभय नंदन प्रसाद श्रीवास्तव उर्फ रवि शंकर श्रीवास्तव;अधिवक्ता/कटिहार ( बिहार)
