रास्तों से लड़े हैं तुम्हारे लिए
जाने कब से खड़े हैं तुम्हारे लिए
थक गए हैं निहार कर पथ नयन
आँसुओं में ढले हैं तुम्हारे लिए
मौज में हम बहे हैं तुम्हारे लिए
गमज़दा भी हुए हैं तुम्हारे लिए
थक गए हैं पुकार कर लब मगर
मौन में हम ढले हैं तुम्हारे लिए
