सुनो दुनिया! आज फिर हिंदी की हुंकार उठी है,
भारत माँ के माथे पर, हिंदी की ललकार उठी है!
यह केवल शब्द नहीं हैं — यह करोड़ों दिलों की आवाज़ है,
यह गंगा की पावन धारा, यह भारत का अंदाज़ है!
हमसे हमारी भाषा छीनोगे? — इतनी ताकत किसमें है?
हिंदी को तुम रोक सको — ऐसी ताकत किसमें है?
यह कबीर की निर्भीकता है, यह तुलसी की तलवार है,
यह प्रेमचंद की कलम बनी, जन-जन की हुंकार है!
माँ ने जिस भाषा में मुझको, पहला शब्द सिखाया है,
उस हिंदी को मैंने अपने, सीने से लगाया है!
दुनिया की भाषाएँ सीखेंगे—ज्ञान का आसमान छुएँगे,
पर हिंदी के सम्मान के आगे, कभी नहीं झुकेंगे!
जिस दिन हिंदी बोलने में, हमें गर्व महसूस होगा,
उस दिन भारत का हर बच्चा, दुनिया में मशहूर होगा!
हिंदी दिवस नहीं — हिंदी का हर दिन त्योहार बने,
भारत की आवाज़ हिंदी हो, हिंदी ही पहचान बने!
उठो युवाओं! कलम उठाओ, हिंदी का इतिहास लिखो,
माँ भारती की जय लिखकर, हिंदी का भविष्य लिखो!
गर्जे भारत! गूँजे हिंदी! आसमान तक शोर हो,
हिंदी का परचम लहराए—और विश्व हमारा गौर हो!
हिंदी हमारी आन है, हिंदी हमारी शान है,
हिंदी से ही हिंदुस्तान है—हिंदी हमारी जान है!
✍️ पंकज महेन्द्रप्रसाद यादव
मुम्बई , महाराष्ट्र
