“तुम जो कहो तो”
तुम जो कहो तो दिल की बातें,
तुमसे थोड़ी कर लूं मैं…
तुम मुझपे मर लो थोडा़ थोड़ा,
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
हो अगर इजाजत इश्क में तेरे,
ये गुस्ताखी कर लूं मैं…
तुम मुझपे मर लो थोडा़ थोड़ा,
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
जब होती हो मेरे सामने,
मैं थोडा़ हकलाता हूं…
पीठ तुम्हारे पीछे तुम्हरी,
बात बहुत बतियाता हूं…
बात बहुत बतियाता हूं…
नजर से तेरी नजर मिलाकर,
नजरों में तुमको भर लूं मैं…
तुम मुझपे मर लो थोडा़ थोड़ा,
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
तेरे मेरे बीच में अब तक,
ये जो थोड़ी दूरी थी…
“प्रगाढ़” प्रेम को करने को,
ये दूरी बहुत जरूरी थी…
ये दूरी बहुत जरूरी थी…
रहे सलामत प्यार हमारा,
ये रब से “इबादत” कर लूं मैं…
तुम हमपे मर लो थोडा़ थोड़ा,
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
तुम जो कहो तो दिल की बातें,
तुमसे थोड़ी कर लूं मैं…
तुम मुझपे मर लो थोडा़ थोड़ा,
थोड़ा तुमपे मर लूं मैं…
ABHI CFO की कलम से…🖋️
अभिषेक मिश्र
शिक्षक (रसायनशास्त्र)
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश.
