एक बहन की विदाई

एक बहन की विदाई
बरसों का साथ निभाया हमने,
हँसी-खुशी के दिन बिताए थे।
खेल-कूद और छोटी-छोटी बातें,
यादों के फूल बन आए थे।
लड़ते-झगड़ते, रूठते-मनाते,
दिन कैसे बीत जाते थे।
नादान थे हम बचपन में,
फिर भी सबको हँसा जाते थे।
माँ की ममता, पिता का साया,
भाई-बहनों का प्यार मिला।
उस छोटे से घर के आँगन में,
जीवन का सारा संसार मिला।
पर एक दिन ऐसा भी आता है,
जब बेटी को जाना पड़ता है।
माँ-बाप का प्यारा सा आँगन,
पीछे छोड़ जाना पड़ता है।
एक चुटकी सिंदूर के साथ,
जीवन का रास्ता बदल जाता है।
माँ-बाप की प्यारी बेटी का,
एक नया घर बस जाता है।
आँखों में आँसू, दिल में यादें,
सब कुछ साथ ले जाती है।
मायके की हर मीठी या

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