उस सुरमई लिबास में जब वो सामने आती हैं,
सादगी से ही जाने कितने रंग चुरा ले जाती हैं।
माथे की वो नन्ही-सी चमक, कानों में झुमके प्यारे,
मुस्कान उनकी लगे जैसे चाँद के हों उजियारे।
हाथ में घड़ी, चेहरे पर मासूम-सी मुस्कान,
पता नहीं क्यों ठहर जाता है उस पल मेरा ध्यान।
कोई पूछे कि क्या खास है उनमें, तो क्या जवाब दूँ यारों,
बस इतना कहूँ—उनके होने से ही खूबसूरत लगते हैं नज़ारे सारे।
