कुछ आज के भूत

कुछ आज के भूत

कुछ आज के भूत
कुछ कल के भूत
दिख रहें है
चारों तरफ
सबके सब
भूत ही भूत।

जैसे चोर को
दिखते सारे चोर
मैं भी चोर
तू भी चोर
ये भी चोर
वे भी चोर

वैसे ही भूतों को
दिखते हैं सारे भूत
मैं भी भूत
तू भी भूत
ये भी भूत
वे भी भूत

पर आदमी को
नहीं दिखता आदमी।
अगर दिखता तो
नहीं होता किसी को
किसी से झंझट
किसी से फूट,

नहीं होता आदमी को
आदमी से वैर
नहीं होता किसी को
किसी से ईर्ष्या, द्वेष,
नहीं होता किसी का
शोषण, दोहन, प्रताड़न
हनन, पतन, उत्पीड़न
नहीं होता किसी को क्लेश।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *