सब खोखला हैं।

सब खोखला है।

जहाँ मन न मिले,
वहाँ तन को भी खड़ा मत करो।
जहाँ शांति और सुकून न मिले,
वहाँ हर पल “जी हुजूर” कहना छोड़ दो।

यहाँ आपकी भावनाओं का कोई मूल्य नहीं,
हर किसी को अपना ही संसार पड़ा है।
आप भीतर से कितना टूट रहे हैं,
किसी को इससे क्या वास्ता है?

आप शांति के लिए
धूर्तता का मुखौटा ओढ़ लेते हैं,
मगर दोपहर तक
आपका मन अशांति में जलता रहता है।

यहाँ आपका कोई मोल नहीं
आपने भीतर कितना दर्द दबा रखा है,
कितनी आहें खामोशी में पी हैं,
इसका हिसाब कोई नहीं रखता।

बस इतना दिखना चाहिए
“हमने यह कर डाला,
हमने जो कहा, वही सत्य है।”

दर्द सुनने वाला कोई नहीं,
दर्द समझने वाला कोई नहीं।
दूसरों की चिंता में यूँ ही,
खुद को खोते रहोगे कहीं।

इस ज़माने में
कोई आपका हमदर्द नहीं,
जो आपको सबसे अधिक जानता है,
कभी-कभी वही
आपके सबसे गहरे घाव दे जाता है।

फिर भी प्रश्न यही है
आप हर दिन जीवित हैं,
या केवल जीवित दिखाई देना चाहते हैं?

यहाँ आपके आँसुओं का भी कोई मूल्य नहीं।
इसलिए दूसरों की आँखों में
अपनी कीमत तलाशना छोड़ दो।

जिंदगी में सचमुच उड़ान देखनी है,
तो पहले स्वयं को महसूस करो
अपने भीतर उतरकर पूछो,
तुम जी रहे हो
या केवल जीने का अभिनय कर रहे हो?

कोई दूसरा
आपको स्थायी शांति नहीं दे सकता।
अगर कोई आपको सुकून दे सकता है,
तो वह केवल आप स्वयं हैं।

इसलिए खुद में झाँको,
दूसरों को जानने, समझने
और हर किसी को समझाने की आदत छोड़ो।

हर प्रश्न का उत्तर बाहर नहीं होता,
कुछ उत्तर
अपने भीतर उतरने पर मिलते हैं।

खुद से मिलो,
खुद को समझो,
और स्वयं में स्वयं को इतना पा लो, कि दुनिया की स्वीकृति
तुम्हारी शांति की शर्त न रह जाए।

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