अंदर की खामोशी

अंदर की खामोशी” किस बात का दिखावा करूँ मैं, जब भीतर ही भीतर टूट रही हूँ। न कोई तमाशा रचा जीवन में, बस चुपचाप खुद से ही रूठ रही हूँ।…

एक बहन की विदाई

एक बहन की विदाई बरसों का साथ निभाया हमने, हँसी-खुशी के दिन बिताए थे। खेल-कूद और छोटी-छोटी बातें, यादों के फूल बन आए थे। लड़ते-झगड़ते, रूठते-मनाते, दिन कैसे बीत जाते…

“तुम जो कहो तो”

“तुम जो कहो तो” तुम जो कहो तो दिल की बातें, तुमसे थोड़ी कर लूं मैं… तुम मुझपे मर लो थोडा़ थोड़ा, थोड़ा तुमपे मर लूं मैं… हो अगर इजाजत…

इश्क़ तौफीक है गुनाह नही

इश्क़ तौफीक है गुनाह नही आपने कुछ और ही समझ लिया, खाओगे तो जानोगे धोखे की बरकतें है क्या गुनहगार थे आप हमने जाहिद समझ लिया, नजरें थीं ही पाकदामन…

दीप साखी

आज मैं देख्यो, राधा-किसन कूँ बन में। बाँसुरी बजाये मोहन, प्रेम पागे मोहिनी कै दृगन में। घघरी ह्वै घूम रही, प्रिया नाचे गाय रही। देखन तै दोनों, मोरी लौ हिल-हिल…

मौन में हम ढले हैं तुम्हारे लिए

रास्तों से लड़े हैं तुम्हारे लिए जाने कब से खड़े हैं तुम्हारे लिए थक गए हैं निहार कर पथ नयन आँसुओं में ढले हैं तुम्हारे लिए मौज में हम बहे…

नर भेड़िया

नर भेड़िया सुबह-सुबह की अखबार में, कुछ छपी थी पंक्तियाँ, न्यूज चैनलों के एपिसोड में, कुछ सुनी थी पंक्तियाँ!! दरिंदों के एक भीड़ में, उठी थी फिर वही हवस की…

हिंदी की हुंकार उपशीर्षक: “माँ भारती की आवाज़, करोड़ों दिलों का गर्व और भारत की आत्मा—हिंदी के सम्मान, स्वाभिमान और भविष्य को समर्पित एक राष्ट्रप्रेमी कविता।”

सुनो दुनिया! आज फिर हिंदी की हुंकार उठी है, भारत माँ के माथे पर, हिंदी की ललकार उठी है! यह केवल शब्द नहीं हैं — यह करोड़ों दिलों की आवाज़…

छोटे छोकरा

होश संभालते ही उसने अपने को बच्चों के झुंड के बीच पाया। वह आश्रम की संचालिका की लाल-लाल आंखें देख कर सहन जाता। सब उस काली मोटी भैंस को बहन…

नदियों की पुकार

नदियों की पुकार स्वार्थ में अंधे हो चुके मानव, क्या तुम्हें नदियों की पुकार सुनाई नहीं देती? कभी जो नदियाँ जीवन का आधार थीं, आज वही तुम्हारी लापरवाही से गंदगी…