एक बहन की विदाई बरसों का साथ निभाया हमने, हँसी-खुशी के दिन बिताए थे। खेल-कूद और छोटी-छोटी बातें, यादों के फूल बन आए थे। लड़ते-झगड़ते, रूठते-मनाते, दिन कैसे बीत जाते…
नर भेड़िया सुबह-सुबह की अखबार में, कुछ छपी थी पंक्तियाँ, न्यूज चैनलों के एपिसोड में, कुछ सुनी थी पंक्तियाँ!! दरिंदों के एक भीड़ में, उठी थी फिर वही हवस की…
नदियों की पुकार स्वार्थ में अंधे हो चुके मानव, क्या तुम्हें नदियों की पुकार सुनाई नहीं देती? कभी जो नदियाँ जीवन का आधार थीं, आज वही तुम्हारी लापरवाही से गंदगी…
रक्षाबंधन क्या होता है रक्षाबंधन? क्या है वास्तव में रक्षाबंधन का अर्थ? क्या सिर्फ इतना कि हर बहन अपने भाई की कलाई पर महंगी से महंगी राखी बाँधे, और बदले…