रक्षाबंधन

रक्षाबंधन क्या होता है रक्षाबंधन? क्या है वास्तव में रक्षाबंधन का अर्थ? क्या सिर्फ इतना कि हर बहन अपने भाई की कलाई पर महंगी से महंगी राखी बाँधे, और बदले…

सब खोखला हैं।

सब खोखला है। जहाँ मन न मिले, वहाँ तन को भी खड़ा मत करो। जहाँ शांति और सुकून न मिले, वहाँ हर पल “जी हुजूर” कहना छोड़ दो। यहाँ आपकी…

कुछ आज के भूत

कुछ आज के भूत कुछ आज के भूत कुछ कल के भूत दिख रहें है चारों तरफ सबके सब भूत ही भूत। जैसे चोर को दिखते सारे चोर मैं भी…

अनहद नाद

अनहद नाद आज समाज के शोर में अनहद नाद सुनाई देता है। मनुष्य के भीतर का मनुष्य कहीं दूर दिखाई देता है।। देश की मिट्टी पूछ रही, मूल्य कहाँ खो…

एक टूर, जिसने बच्चों को नहीं… मुझे बदल दिया

एक टूर, जिसने बच्चों को नहीं… मुझे बदल दिया गुरुकुल कोचिंग सेंटर के बच्चों के साथ टूर पर जाना मेरे लिए आसान निर्णय नहीं था। सच कहूँ तो मैं जाना…

मन के अंदर झांक

मन के अंदर झाँक मन के अंदर झांक रे मनवा मन के अंदर झांक। बाहर का मत खोल रे दरबा मन के अंदर झांक रे मनवा मन के अंदर झांक।…

बेटियाँ विदा हो जाती हैं

मायके के आँगन से बेटियाँ विदा हो जाती हैं , बाबुल का आँगन , माँ का आँचल , यादों में सहेजे मुस्काती हैं॥ नन्हे गुड्डे गुड़ियों के ब्याह रचाते रचाते…

समाजसेवा : बदलाव की एक छोटी-सी शुरुआत

“समाजसेवा : बदलाव की एक छोटी-सी शुरुआत” लेख समाजसेवा केवल बड़े-बड़े कार्य करने का नाम नहीं है। किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी बच्चे को पढ़ने के लिए…

ज़माना बदल गया है

ज़माना बदल गया है ******************* ख़ुद पर करें ऐतवार, खुद से करें प्यार , ज़माना बदल गया है। सज्जन बन, करें वक्त का इंतजार, ज़माना बदल गया है। दुष्टों का…

प्रेमचंद के करीब

मैंने प्रेमचंद को किसी पुराने पन्ने पर नहीं, उस खेत की दरारों में पढ़ा है जहाँ बीज से पहले किसान अपना विश्वास बोता है। मैंने उन्हें देखा है उस पगडंडी…